Saturday, 18 April 2020

कितने रंग भर गये जिन्दगी मे, 
कितने रंग भरने अभी बाकी है. 

कितने हँसे कितने रोए हम, 
अभी और मुस्कुराना बाकी है. 

कितने किरदार देखे है जिन्दगी मै, 
खुद की पहचान बनाना बाकी हैं. 

कहते है सांसे अनमोल होती हैं, 
इन सांसो का कर्ज चुकाना बाकी हैं. 

कितने दिन और कितनी राते जाने फ़नाह हो गयी, 
कुछ पल खुद के लिए जीना बाकी हैं. 

हसरत है अभी खुद के लिए जिये हम, 
के अभी खुद से आँख मिलाना बाकी है . 

हर पल जिन्दगी खतम सी हो रही, 
अभी हर पल को जीना बाकी है. 



ऐ दिल तू मगरूर सा क्यों है
अपने एहसासो को दबाता क्यों है, 

ना जाने किस मोड पर मिल जाए वो
ये सोच कर रास्ता बदल लेता क्यों है, 



मुस्कुराता हु पर हस्ता नही, 
रोता बहुत हु पर दिखाता नही. 

दर्द मुझे भी होता है ए दोस्त, 
दिल तो दिल ही है पथर  तो नही. 


ना सीख पाए हम, ना सीख पाए हम
तेरा मुझसे वो हाल पूछना मेरा,
बदले मे चाहना पूछूँ मे भी हाल तेरा
तेरे वो मन का इशारा, ना सीख पाए हम.

तेरा पहले मुझसे पहोचकर इंतजार करना
ओर चलने के नाम पर आँखे नम करना,
बस उदास होकर घर को चल देना
ना सीख पाए हम, ना सीख पाए हम.

तेरी वो खवाहीसे साथ हो बस हम दोनो
बाकी दोस्तो के साथ आने पर उदास होना
वो गुजारिस भरी नजरो से मेरी ओर देखना
वो दिल की बात ना सीख पाए हम.

मेरे रूठने पर तेरा वो फोन करना
मेरे हैलो हैलो पर सिर्फ 'कुछ नही ' बोलदेना,
मेरा हस्कर तुझे पागल बोल कर  फोन रख देना
तेरी वो बेकरारी ना सीख पाए हम.

जब तुम दूर हुए तो पहचाना तड़प को
दिल की सिसकरियो को दबाने के हुनर को
पर देर बहुत हो गयी अब क्या फायदा
इस दिल को समझाना सीख लिए हम. 
                 सीख लिए हम,,,,,,,,,,,,,,,,,


Jeevan jeena



जीवन जीना आसान नही मेरे दोस्त
नाजाने कितने यहाँ roej हार जाते हैं,
कोई माँ बाप के लिये कोई बच्चो के लिये
चिलचिलाती धूप से लड़ना सीख जाते हैं,


माँ बाप के लिए उन्ही से दूर जाना
दिल पर पथर रखने के बराबर होता हैं,
जब याद आती है माँ की खाना खाते समय
रोटियों को भी आशुओ से गीला होते देखा हैं,


मजबूरी कहो या कहो उनकी दीवांगी
हर इंसान कही ना कही लड़ता नजर आता हैं,
जीवन भर जतन किये ऐशोआराम के लिये
एक वक़्त वो भी बेबस हाथजोड खड़ा रह जाता है




Vishal(vansy)