Saturday, 18 April 2020

कितने रंग भर गये जिन्दगी मे, 
कितने रंग भरने अभी बाकी है. 

कितने हँसे कितने रोए हम, 
अभी और मुस्कुराना बाकी है. 

कितने किरदार देखे है जिन्दगी मै, 
खुद की पहचान बनाना बाकी हैं. 

कहते है सांसे अनमोल होती हैं, 
इन सांसो का कर्ज चुकाना बाकी हैं. 

कितने दिन और कितनी राते जाने फ़नाह हो गयी, 
कुछ पल खुद के लिए जीना बाकी हैं. 

हसरत है अभी खुद के लिए जिये हम, 
के अभी खुद से आँख मिलाना बाकी है . 

हर पल जिन्दगी खतम सी हो रही, 
अभी हर पल को जीना बाकी है. 

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